नर्क से भी ज्यादा यातना मिलती है उत्तरी

2009 की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबर कैम्प्स में कैदियों को खाने के नाम पर केवल सड़े हुए मकई के कुछ दानों का नमकीन सूप ही नसीब होता है। 90 के दशक में यहां भयंकर अकाल पड़ा था। तब खाने को कुछ नहीं था। लाखों लोग बेमौत मारे गए। शिन डॉन्ग ह्यूक, कैशन सिटी में मौजूद ‘कैम्प 14’ में जन्मी थी। खाने के अभाव के चलते उसने यहां छिपकली, सांप और चूहे से लेकर हर रेंगता जीव खाया था। उसने बताया, “कैम्प में ढेर सारे चूहे थे। उन्हें खाने के लिए कैदी झगड़ने लगते थे। लेकिन चूहों को खाने के लिए भी गार्ड्स की परमिशन लेनी पड़ती थी।”

महिला जेल से बच निकली जी हीऑन के मुताबिक, “यहां अकसर प्रेग्नेंट कैदियों के बच्चे गर्भ में ही मार दिए जाते हैं। पर एक ने जिंदा जन्म दिया। सब खुश थे। इतने में वहां गार्ड्स आ गए। फिर मां के सामने ही उसके बच्चे को पानी में डुबो कर मार डाला।”
शिन डॉन्ग ह्यूक ने बताया, “मैं तब पांच साल की थी। मिलिट्री ने एक शख्स को लकड़ी के खंभे से बांधने के बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।”

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