दुनिया के सबसे खतरनाक लेकिन सीक्रेट हथियार, बाहर आए तो मच जाएगा हंगामा। जी हां आज के समय में जब हर देश सबसे ताकतवर देश बनना चाहता है। ताकि वो बाकी दुनिया पर अपना वर्चस्व स्थापित कर सके ऐसे में यह सबसे जरूरी हो जाता है की आपकी सेना कितनी शस्क्त है। और सेना को मजबूत बनाने के लिए और दुनिया में अपने दबदबा बनाने के लिए हथियारों का होना अहम हो जाता है।

साल 2015 के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के टॉप 15 देशों ने करीब दस लाख अरब रुपए से भी ज्यादा अपने मिलिट्री बजट पर खर्च किये हैं। इसमें अमेरिका और चीन पहले पायदान पर है वो अपने मिलिट्री बजट पर सबसे ज्यादा रकम खर्च करते हैं। लेकिन अब भारत भी इसमें पीछे नहीं है। साल 2015 में मिलिट्री बजट के तौर पर भारत ने करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपए आवंटित किये हैं।

शायद आपको पता ना हो लेकिन कई बार देश को मजबूत बनाने के लिए साइंटिस्ट कुछ नए हथियार ईजाद करते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रिय नियमों का उलंघन ना हो इसलिए इसकी जानकारी दुनिया को नहीं दी जाती है। दुनिया में कुछ ऐसे बेहतरीन हथियार भी इजाद किये जा चुके हैं जिनकी आज भी कल्पना करना नामुमकिन सा है। आइये आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ एडवांस्ड मिलिट्री हथियारों के बारे में।

दुनिया के सबसे खतरनाक लेकिन सीक्रेट हथियार, बाहर आए तो मच जाएगा हंगामा!

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1. Laws: आपने साइंस फिक्शन फिल्मों में लेजर गन देखी होंगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसी बंदूकें और दूसरे बड़े लेजर हथियार असल जिंदगी में भी मौजूद हैं। इन्हें LAWs या लेजर वेपन सिस्टम कहा जाता है। फिल्मों में इन्हें उतना मारक नहीं दिखाया जाता लेकिन हम आपको बता दें कि अमेरिकन सेना द्वारा विकसित किया गया Laws, ड्रोन और छोटी सैनिक बोट्स को करीब एक किलोमीटर दूर से मार गिराने में सक्षम है।

2. इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गन: इसे रेल गन के नाम से भी जाना जाता है। ये घातक मैग्नेटिक एनर्जी से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। फिलहाल ऐसी गन को बना तो लिया गया है लेकिन ये आकर में इतनी बड़ी है कि इसे इस्तेमाल करना शुरू नहीं किया जा सका है। फिलहाल इलेक्टोमैग्नेटिक फ़ोर्स के जरिये छोटी गन विकसित करने के लिए एक्सपेरिमेंट किये जा रहे हैं। बताया जाता है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गन करीब 100 मील दूर से भी हमला करने में सक्षम है।

3. Adaptivcloaking: ये मिलिट्री टेक्नोलॉजी हॉलीवुड मूवी प्रीडेटर में दिखाए गए हथियारों से मिलती जुलती है। इसे स्वीडन के BAE सिस्टम्स ने बनाया है। इस तकनीक से आप टैंक और ड्रोन को अदृश्य कर सकते हैं। ये ऐसा थर्मल इलेजिंग डिवाइस के जरिये करती है। इसमें टैंक को अडैपटिव प्लेट्स से कवर कर दिया जाता है। ये प्लेट्स एक्टिव होने के बाद टैंक थर्मल सेंसर में डिटेक्ट होना बंद हो जाता है साथ ही इसे दिन के वक़्त देखना भी काफी मुश्किल है। इसे इतना भी विकसित किया जा चुका है कि टैंक खुद को एक छोटी कार की तरह डिटेक्ट करा सकता है।

4. फेजर राइफल: PHASER राइफल को अमेरिकी सेना ने बनाया है। इसे मैन पोर्टेबल लेजर वेपन भी कहा जा सकता है। बता दें कि अंधे करने वाले लेजर वेपन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। इसी के चलते ये राइफल्स दुश्मन को कुछ वक़्त के लिए अंधा करने के लिए इस्तेमाल में लायी जा सकती है। इससे जान को कोई नुकसान नहीं है।

5. लेजर गाइडेड बुलेट: अपने लेजर गाइडेड मिसाइल्स के बारे में तो सुना होगा लेकिन हम आपको बता दें कि ऐसी बुलेट्स की भी खोज की जा चुकी है। अमेरिकी सेना ने ऐसी बुलेट्स तैयार भी कर ली हैं और जल्द ही इन्हें इस्तेमाल में भी लाना शुरू कर लिया जाएगा। ये बुलेट्स 50 कैलिबर स्नाइपर बुलेट के जैसी ही हैं। हालांकि ये कभी भी निशाना नहीं चूकेंगी और लक्ष्य के अपनी जगह से हटने के बावजूद उसे निशाना बनाने में सक्षम है। अगर एक बार लेजर से निशाने को लॉक कर लिया गया तो फिर निशाना चूकना लगभग नामुमकिन है।

6. एक्टिव डिनाइल सिस्टम: इसे हॉलीवुड फिल्मों में आपने हीट रे गन के नाम से देखा है। इसे आप एक ऐसा माइक्रोवेव ओवन समझिए जिसका इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है। ये बहुत ज्यादा घटक तो नहीं है लेकिन भीड़ को तितर-बितर करने और दुश्मन की सेना को डराने के लिए बेहतरीन हथियार माना जाता है।

7. हाइपरसोनिक स्ट्राइक मिसाइल: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही हर देश की मिलिट्री ऐसी मिसाइल्स बनाने पर काम कर रही हैं जो ज्यादा तेज गति से और ज्यादा दूर तक वार करने में सक्षम हो। क्रूज मिसाइल्स के मुकाबले ये ज्यादा दूरी और ज्यादा एक्यूरेसी के साथ वार करने में सक्षम हैं। क्रूज मिसाइल्स जहां 600 KM प्रति घंटे की स्पीड से चलती हैं वहीं अमेरिका की 1A वेवराइडर 1700 मीटर प्रति सेकेण्ड की रफ़्तार से लक्ष्य तक पहुंच सकती है।

8. LS3: ये एक रोबोट है जो कि अमेरिकन मिलिट्री ने तैयार किया है। ये एक गाय के साइज़ का है और हथियारों से लैस भी है। ये करीब 200 किलो वज़न उठा सकता है और तकरीबन हर मौसम में काम करने में सक्षम भी है। इस रोबोट को किसी भी ओपरेटर की ज़रुरत नहीं है और एक बार प्लान फीड होने के बाद ये खुद नेविगेशन के सहारे लक्ष्य तक पहुंच सकता है। ये 25 मील प्रति घंटा की रफ़्तार से भी ज्यादा से दौड़ सकता है।

9. SWARM: ये भी एक तरह के ड्रोन भी है लेकिन इनकी खासियत ये है कि युद्ध के दौरान ये सभी ड्रोन आपस में मिलकर काम कर सकते हैं। अमेरिका ने Locust नाम के ऐसे सिस्टम को विकसित भी कर लिया है। हालांकि इसे चलाने के लिए किसी इंसान का होने ज़रूरी है।

10. Atlas: आप इसे सच का टर्मिनेटर समझ लीजिए। एटलस एक ह्यूमिनोइड रोबोट है जो कि बहुत ही एडवांस्ड तकनीक पर काम करता है। 6 फुट लंबा और करीब 140 किलो का ये रोबोट सेंसर, कैमरे और लेजर्स के जरिये रास्ता ढूंढने और हमला करने में भी सक्षम है।

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