जवान तो छोड़िए, बुड्ढे भी हैं इसके फिराक में

छमिया

जवान तो छोड़िए, बुड्ढे भी हैं इसके फिराक में। छमिया के दीवानों की कोई कमी नहीं है। आप जब इस छमिया से मिलेंगे तो आपका नाम भी इसके दीवानों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा। वैसे अपनी छमिया है मस्त। ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर, लेकिन जिससे बैर ले लिया उसकी नहीं है खैर।

जी हां छमिया के पीछे गांव के पूरे लड़के पड़े थे। वो जहां आती जाती थी वहीं वो लड़के पहुंच जाते और सब की लार टपकती रहती। छमिया से बात करने के बहाने तो बूढ़े भी ढ़ूंढते हैं लेकिन छमिया है कि किसी के हाथ नहीं आने वाली।

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