एक तरफ तो लकम्मा देवी के मंदिर में चप्पलों के हार चढ़ाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे कई मंदिर हैं जहां चप्पल, जूते पहनकर मंदिर में प्रवेश नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। और वो यह कि मंदिर की फर्श का निर्माण पुराने समय से आज तक इस तरह किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम सकारात्मक ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।

 

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