कभी कभी जिंदगी ऐसे हालात पैदा कर देती है कि अपने दिल के अरमानों को जलाना पड़ता है और समय के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। ऐसा ही खेल खेल रही है जिंदगी पहली कक्षा में ए ग्रेड से उत्तीर्ण शहजादी के साथ। जिसका सपना पढ़ लिख कर बहुत आगे जाने का है लेकिन हालात इतने खराब हो गए कि उसे मजबूर होना पड़ा। शाजादी की मां की मौत के बाद से ही उन्हें अपने बीमार पिता की वजह से अपना किराये का मकान भी त्यागना पड़ा। मजबूरी हालत में शाजादी और उसके पिता जैसे तैसे भीख मांग कर फुटपाथ पर ही अपनी जीविका चला रहे हैं।
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